Friday, September 2, 2011

समा बाँधा था हमने कुछ इस तरह शायरी से,
आप आ गए मदहोशी छा गयी,
जाने के बाद आप के ना लगा दिल शायरी में,
भूल गए शायरी अब तो आशिकी आ गयी !!
.................................. दिनेश ज. सुर्वे.

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