Friday, May 3, 2013

मन में है क्या ..................!

मन में हैं क्या कभी कोई माने ना
तन में हैं जज्बात कभी कोई जाने ना
तेरी लगन ऐसी लगी, तू भी कभी इसको
जानेना मानेना सोचेना समझेना
मन में है क्या ..................!

इस प्यार को क्या नाम दे
जिसका कोई भी वजूद नहीं
तेरे बिना तेरे सिवा
दिल को किसी की जरूरत नहीं
आ पास आ दिल की  सदा
पर तू भी कभी इसको
जानेना मानेना सोचेना समझेना
मन में हैं क्या ................. !!

हम जिंदगी को भूलकर
तस्वीर से तेरी चाहत करें
हैं ये दुआ रब से सदा
के वो भी हम पे इनायत करें
मेरे खुदा सुन ले ज़रा
पर तू भी कभी मुझको
जानेना मानेना सोचेना समझेना
मन में हैं क्या ................... !!!

.......................... दिनेश जगन्नाथ सुर्वे. 

तेजाब आसवांचा

लोचनांत माझ्या विरघळतात स्वप्ने
तेजाब आसवांचा विरघळतात स्वप्ने !

अंबरात मेघ, वारा गेले लांब कोसळूनी
जा तुम्ही ही दूर आठवनिंनो नयन बरसतील आता
नको सावल्यांनो थांबवा ते घुटमळणे
आभासालाही दचकून स्वप्ने बिथरतात आता !!

खंजीर भावनांचे हृदयात आत वसले
गंभीर त्या वणांचे पडसाद ना उमटले
मी द्रोह करुनी याचा फार क्षीण जाहलो
मरता मरे मरेना स्वप्नांत भंग झालो !!!
……………………… दिनेश जगन्नाथ सुर्वे.