Wednesday, February 2, 2011



पलकों पे आंसुओं को सजाया ना जा सका,
उसको भी हाल ए दिल का बताया ना जा सका !
ज़ख्मों से चूर चूर था ये दिल मेरा,
एक ज़ख़्म भी उस को दीखाया न जा सका !!
जब तेरी याद आई दिल को तकलीफ तो हुई मगर,
...आँखों में आंसुओं को छुपाया न जा सका !!!

No comments:

Post a Comment