हमको तो पीने कि आदत नही थी, और पीने कि हमको जरूरत भी नही थी !
पर जब से अपनाया नजरो ने आपको, नजरो से पीने कि आदत हो चुकी है !!
लगता है ऐसे अब जान लेगी ये आदत, आदत ये अभी बेशुमार हो रही है !
काश बचाले कोई इन कातिल नजरो से, नजरे ये अभी धारदार हो रही है...!!!
.................................. दिनेश जगन्नाथ सुर्वे.
पर जब से अपनाया नजरो ने आपको, नजरो से पीने कि आदत हो चुकी है !!
लगता है ऐसे अब जान लेगी ये आदत, आदत ये अभी बेशुमार हो रही है !
काश बचाले कोई इन कातिल नजरो से, नजरे ये अभी धारदार हो रही है...!!!
.................................. दिनेश जगन्नाथ सुर्वे.
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